Indian Institute of AstroPhysics
घर अंग्रेज़ी
       
Home
 
इंट्रानेट
निविदा




 
गौरीबिदनूर वेधशाला

गौरीबिदनूर टेलीस्कोप

यह वेधशाला संस्थान के बेंगलूर केन्द्र से 100 कि.मी उत्तर में स्थित है। अक्षांश (लैटिट्यूड) : 13º 36' 12'', रेखांश (लॉन्जिट्यूड) : 77º 26' 07'' पूर्व। यहाँ सन् 1976 से रमन अनुसंधान संस्थान के संयुक्त सहयोग से डेकामीटर तरंग रेडियो टेलीस्कोप प्रचालित है। T' विन्यास में व्यवस्थित यह टेलीस्कोप 1000 द्विध्रुवी से बनाया गया है जिसकी पूर्व-पश्चिम शाखिका 1.4 कि.मी है तथा दक्षिण शाखिका 0.5 कि.मी. है। इसका उपयोग सूर्य तथा आकाश की अन्य भिन्न-भिन्न वस्तुओं द्वारा उत्पन्न होने वाले रेडियो तरंगों के अध्ययन के लिए किया जा रहा है। इस व्यवस्था से आज तक किए अवलोकनों में सर्वाधिक उल्लेखनीय हैं -

i) सूर्य के प्रभामंडल में विवक्त स्रोतों से मद्धिम गति से परिवर्तित हो रहे रेडियो उत्सर्जन के प्रथम द्वि-आयामी प्रतिबिंब।
ii)30 दक्षिण से 30 उत्तर के झुकाव क्षेत्र में 34.5 MHz पर रेडियो स्रोतों का पूर्ण आकाशीय सर्वे।
iii)ताराभौतिकी स्रोतों में निम्न आवृत्ति कार्बन पुनर्संयोजन रेखाऐं।

विस्फोटित हो रहे सितारों और तारामंडलों के समूह के बीच के रिक्त स्थानों में उपस्थित गैसीय अवशिष्टों का भी अध्ययन किया गया है। एक नए एवं संवेदनशील पार्श्वग्राही की सहायता से पल्सरों का अध्ययन वर्तमान में प्रमुख गतिविधि है।

गौरीबिदनूर रेडियोहिलियोग्राफ (GRH)
सूर्य के बाहरी प्रभामंडल की द्वि-आयामी तस्वीरों को 40-150 MHz की अलग-अलग आवृत्तियों पर प्राप्त करने के लिए, एक रेडियो हिलियोंग्राफ भी यहाँ 1997 से क्रियाशील है। इसमें उपयोग किया जाने वाला मूल ग्राही तत्व है - लॉग-पीरियोडिक द्विध्रुव और इस व्यवस्था में इनकी संख्या 192 है। ये द्विध्रुव GEETEE की तरह ही T' विन्यास में व्यवस्थित है। वर्तमान में इस यंत्र के स्थानिक एवं कालवाची विघटन क्रमशः 5 आर्क मिनट व 256 ms हैं। व्यवस्था का प्रचालन नियमित होता है और अवलोकन अवधि प्रतिदिन सुबह के 9 बजे से शाम के 5 बजे(3.30 - 9.30 UT) होती है।
   
सूर्य के बाहरी प्रभामंडल और वहाँ की विभिन्न विविक्त संरचनाओं के रेडियो उत्सर्जन की शक्ति व स्थानिक जानकारी प्राप्त करने के लिए 1024 चैनल का डिजीटल कॉरिलेटर प्रयोग किया जाता है। GRH का आवृत्ति विस्तार विशिष्ट है। यह सूर्य प्रभामंडल में 0.2-0.8 Rs (सूर्य की सतह के ऊपर) की ऊँचाई पर उपयोगी जानकारी प्रदान करता है। यह जानकारी जमीन पर स्थित अथवा अंतरिक्ष में विद्यमान श्वेत-प्रकाश कॉऐनोग्राफ्स की सहायता से प्राप्त करना कठिन कार्य है। इस क्रम आवृत्ति में कोई और रेडियो टेलीस्कोप वर्तमान समय में विश्व में कहीं भी कार्य नहीं कर रहा है। GRH के साथ अब तक किए गए अवलोकनों में से उल्लेखनीय हैं -

(i) एक CME की पूर्व-घटित संरचना का घनत्व/ताप परीक्षण
(ii) सूर्य की सतह के समीप एक CME की गति/संवेग
(iii) त्रि-आयामी अंतरिक्ष में एक CME की वास्तविक गति
(iv) एक दूरस्थ कॉस्मिक रेडियो स्रोत के कोणीय अवलोकनों द्वारा सूर्य से ~ 40 Rs पर एक CME के प्राचलों का अनुमान
(v) रेडियो बर्स्ट उत्सर्जन ट्रेसर रूप में उपयोग करते हुए सूर्य प्रभामंडल का भूकंप-विज्ञान
(vi) सूर्य की सतह से 0.2-0.8 Rs ऊँचाई पर प्रभामंडलीय इलेक्ट्रॉन घनत्व ढाल और
(vii) सूर्य के प्रभामंडल की सतहों से उत्सर्जित हो रहे चुंबकीय फ्लक्स से संबंधित रेडियो उत्सर्जन के लाविक लक्षण।

भविष्य योजना
GRH व्यूह आमाप में वृद्धि करने तथा मीटर-डेकामीटर तंरग दैर्घ्य परास में सौर किरीट को बेहतर कोणीय विभेदन द्वारा अनुसंधान करने की योजना बनाई गई है।

दूसरे प्रावस्था के ब्राजीलियन डेकामीटर व्यूह के लिए आई.एन.पी.ई (INPE) ब्राजील के साथ समझौता-ज्ञापन।

मॉरीशस विश्वविद्यालय के साथ सहयोग ताकि मॉरीशस रेडियो टेलीस्कोप द्वारा नियमित सौर प्रेक्षण किये जा सकें।

संपर्क
गौरीबिदनूर वेधशाला
बी.ए.आर.सी. (BARC) भूकंपी व्यूह स्टेशन के निकट
गौरीबिदनूर, होस्सूर पोस्ट
कोलार जिला - 561 210, भारत
दूरभाष : 91 8155 - 282025
91 8155 - 282511
ई-मेल : webmaster@iiap.res.in

पहुँच

रेल द्वारा
वेधशाला से निकटतम रेलवे स्टेशन गौरीबिदनूर (बेंगूलर से 100 कि.मी) है। बेंगलूर से धर्मावरम, हिन्दुपुर तथा मुंबई की ओर जाने वाली सभी ट्रेनें गौरीबिदनूर में रुकती हैं।

सड़क द्वारा
गौरीबिदनूर से 8 कि.मी की दूरी पर कोटालदिन्ने में स्थित इस वेधशाला तक सड़क द्वारा पहुँचा जा सकता है। बेंगलूर से यल्हंका, दोड्डबलापुर होते हुए सड़क द्वारा बड़ी आसानी से इस वेधशाला तक पहुँचा जा सकता है।